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एन. रघुरामन का कॉलम:‘25 मिनट’ तकनीक से व्यक्ति सर्वश्रेष्ठ परिणाम हासिल कर सकता है
‘सर, प्लीज बताइए कि हमारे समय को कैसे मैनेज करें?’ युवा मुझसे यही एक सवाल कई बार पूछ चुके हैं। जब भी वे पूछते हैं, मैं तुरंत अपना जवाब ऐसे देता हूं कि ‘माइंड को मैनेज करने के लिए आपको योग करने की जरूर...
2 months ago -
प्रो. मनोज कुमार झा का कॉलम:कहने का सलीका हो तो गैर-सलीकेदार बात भी ढंग से कह सकते हैं
लोकतंत्र की असली पहचान केवल चुनावों से ही नहीं, बल्कि इस बात से भी होती है कि वह असहमति को किस भाषा में व्यक्त करता है। राजनीति की भाषा समाज की संस्कृति गढ़ती है। जब संवाद में संयम, सम्मान और संवेदनशी...
2 months ago -
विराग गुप्ता का कॉलम:हमारे पुलिस-तंत्र में जरूरी सुधारों का समय आ गया है
कॉकरोच वाले मामले की जड़ में गवर्नेंस की विफलता के साथ मंत्री, अफसर, पुलिस, जज और वकीलों के किरदार शामिल हैं। इस पिरामिड की सबसे अहम कड़ी पुलिस है। ट्विशा शर्मा मामले में भी पीड़िता के परिजनों को एफआईआर...
2 months ago -
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:मां के हाथ के भोजन में होते हैं स्मृति, प्रेम और पवित्रता
अपनी हैसियत के बाहर जाकर बच्चों के भविष्य के लिए कुछ करना आज भारतीय माता-पिता की जीवनशैली बन गया है। वहीं सरकार में बैठे लोग अपनी हरकतों से बच्चों के सपनों पर प्रहार करते हैं। इस समय परीक्षा-शैली, पढ़...
2 months ago -
अर्घ्य सेनगुप्ता का कॉलम:अदालतों का काम विवादों को सुलझाना है बढ़ाना नहीं
न्याय-तंत्र में एक खास तरह का आत्मविश्वास होता है, जो उसे जीवन के बड़े सवालों पर फैसला सुनाने में सक्षम बनाता है। इसमें न झिझक होती है, न कोई आत्मसंदेह, बल्कि उस व्यक्ति जैसी निर्णायकता होती है, जिसने...
2 months ago -
शेखर गुप्ता का कॉलम:क्या इतिहास फिर से खुद को दोहराएगा?
इतिहास खुद को दोहराता है। आज जो कुछ हो रहा है, उस पर नजर डालें तो लगेगा 1973 में जो ऐतिहासिक संकट आया था उसकी वापसी के संकेत मिल रहे हैं। वैसे अभी इसे हम कयामत की आहट नहीं कहेंगे। कारण, पिछले 53 वर्षो...
2 months ago -
मिन्हाज मर्चेंट का कॉलम:अंग्रेजों ने जो हमसे छीना, उसे हम धीरे-धीरे फिर पा चुके हैं
18वीं सदी में भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था का लगभग 25% हिस्सा हुआ करता था। वस्त्र उद्योग उसकी समृद्धि का केंद्रीय आधार था। भारतीय कपास पूरी दुनिया पर छाई हुई थी। सूती वस्त्रों का निर्यात यूरोप, अमेरिका औ...
2 months ago -
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:कोई गुरु न मिले तो हनुमान जी को अपना गुरु बनाइए
दुनियादारी के प्रति भ्रम हो तो उसका निपटारा हो भी जाता है, लेकिन जब भ्रम ईश्वर के प्रति होता है तो पूरा जीवन गड़बड़ा सकता है। काकभुशुंडिजी ने एक पंक्ति बोली- निर्गुन रूप सुलभ अति सगुन जान नहिं कोई, सु...
2 months ago -
एन. रघुरामन का कॉलम:मुनाफे के लिए समस्या को आने से पहले ही पहचानें, समाधान विकसित करें
जब दूसरी कंपनियां अपना बजट फ्रीज कर रही हों और एक कंपनी तेजी से भर्तियां करने लगे तो स्वाभाविक ही यह आपका ध्यान खींचेगा। इसीलिए जब मैंने सुना कि थाईलैंड में अपना मुख्यालय रखने वाला एग्री-टेक स्टार्टअप...
2 months ago -
डॉ. अरुणा शर्मा का कॉलम:क्या दुनिया में आज ऐसी कोई संस्था नहीं, जो दखल दे सके?
विश्व युद्धों के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएन) की स्थापना इसलिए की गई थी, ताकि भविष्य में हिरोशिमा-नागासाकी जैसी विनाशकारी घटनाओं और व्यापक पैमाने पर होने वाले युद्धों को रोकने के लिए बातचीत का मंच त...
2 months ago -
एन. रघुरामन का कॉलम:सेहतमंद खाना बार-बार की बीमारी और अस्पतालों के चक्करों से बचाता है
कुछ महीने पहले जब मेरी पत्नी अस्पताल में थीं तो साथ बैठकर हम पूर्वजों के बारे में बात कर रहे थे कि वे लोग बहुत कम या शायद ही कभी डिस्पेंसरी गए हों। अपनी ग्रेट-ग्रैंडमदर से लेकर बाकी बुजुर्गों के जीवित...
2 months ago -
एन. रघुरामन का कॉलम:कोई न कोई हमेशा ही हमारी हिंसा की कीमत चुका रहा होता है
भोपाल की सबसे व्यस्त सड़क किसी भी शाम घर लौटने की हड़बड़ी से भरे यात्रियों की अराजक भीड़ से भरी रहती है। लेकिन इस शुक्रवार उसकी सामान्य रिदम टूटकर एक ठहराव में बदल गई। इसका कारण किसी निर्माण कार्य से...
2 months ago -
ज्यां द्रेज का कॉलम:जीने के हमारे पुराने तरीके कहीं गुम होते जा रहे हैं...
पुराने दिनों में रांची एक सुंदर शहर हुआ करता था। तब यह आज के जैसा बड़ा शहर नहीं, बल्कि एक छोटा-सा कस्बा था, जिसके चारों ओर कई आदिवासी बस्तियां थीं। बीच में बहुत सारे तालाब, नदियां और बगीचे थे। फिर धी...
2 months ago -
डॉ. राम चरण का कॉलम:आत्मविश्वास जरूरी पर इसे भी लगातार ‘रिन्यू’ करना होता है
दुनिया में छह दशकों तक सीईओ और निदेशक मंडलों को परामर्श देने के दौरान मैंने लगातार एक ऐसी विशेषता देखी है, जो ग्रेट लीडर्स को गुड लीडर्स से अलग करती है। वह बुद्धिमत्ता नहीं है। रणनीति नहीं है। वह केवल...
2 months ago -
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:बदलते समय में परिवारों का आधार परमात्मा होना चाहिए
कुछ बातों ने बाहर का जीवन तो दूभर कर ही दिया है- शोर, शराबा, शराब, शान, शौकत। इनके कारण बाहर की दुनिया बड़ी विचित्र-सी और बेचैन करने वाली हो गई। एक वक्त था जब शांति की तलाश में लोग बाहर से घर आते थे। ल...
2 months ago -
एन. रघुरामन का कॉलम:क्या आप रिटायरमेंट के गोल्डन रूल्स फॉलो करते हैं?
हाल ही में मेरे दो क्लासमेट्स को भागकर नागपुर जाना पड़ा, क्योंकि तीसरा क्लासमेट रसोई के पीछे उस ढलाननुमा गड्ढे में उल्टा गिर गया, जहां एसी के आउटडोर यूनिट भी रखे जाते हैं। चूंकि गर्मी बहुत तेज थी और ल...
2 months ago -
बोरिया मजुमदार का कॉलम:खेल की दुनिया में नस्लवादी टिप्पणियों की कोई जगह नहीं
कुछ दिनों पहले मैंने सोशल मीडिया पर अर्शदीप सिंह द्वारा तिलक वर्मा की चमड़ी के रंग का मजाक उड़ाने संबंधी एक पोस्ट को देखा। तिलक ने उस बात को सहज रूप से टाल दिया और सोशल मीडिया पर भी इसे सामान्य ढंग स...
2 months ago -
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:मेलजोल और अपनापन भी एक तरह की देशसेवा है
राजनीतिक दल एक-एक करके हमारे देश के प्रदेशों पर खूब काम कर रहे हैं। सरकारें बदल गईं, नई-नई योजनाएं रूप ले रही हैं। हर प्रदेश प्रमुख का दावा है कि हमने श्रेष्ठ कर दिया, लेकिन अब प्रदेश के साथ-साथ समाज...
2 months ago -
पवन के. वर्मा का कॉलम:दोष सिद्ध होने से पहले ही सजा देना कितना न्यायपूर्ण?
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उमर खालिद को जमानत देने से अतीत में किए गए अपने ही इनकार पर प्रश्न उठाए हैं। उमर पांच वर्ष से अधिक समय से कारावास में हैं। यह संकेत देता है कि देश की सर्वोच्च अदालत स्वयं र...
2 months ago -
एन. रघुरामन का कॉलम:समस्या से बचें नहीं, सामना करें, कौन जाने आप ही समाधान खोज लें
दूसरों के बारे में तो मुझे नहीं पता, लेकिन मेरे परिवार को हाल ही में घरेलू मोर्चे पर एक समस्या झेलनी पड़ी। हमारे घर में काम करने वाले लोग गांव चले गए। यह हर साल का रिवाज है, किन्तु उनकी जगह काम करने वा...
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नंदितेश निलय का कॉलम:क्या यह संकट बीतने के बाद भी हम सादगी का सबक याद रखेंगे?
ऊर्जा संकट के बीच देश में विभिन्न क्षेत्रों के लीडर्स अपनी बड़ी कारों और उसके काफिले को छोड़ साइकिल या पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर सवारी करते दिखे। 1970 के दशक के दौरान भी वह दौर आया था, जब तेल संकट के बीच...
2 months ago -
पिनेलोपी गोल्डबर्ग का कॉलम:दुनिया की दो महाशक्तियों को साथ काम करना होगा
बीजिंग में डोनाल्ड ट्रम्प और शी जिनपिंग के बीच हुई समिट में भले ही टैरिफ, ताइवान या ईरान युद्ध जैसे मुद्दों पर कोई निर्णायक चर्चा नहीं हुई हो, फिर भी जिस संयमित और सौहार्दपूर्ण तरीके से वह शिखर-वार्त...
2 months ago -
शेखर गुप्ता का कॉलम:पाक की नियति बन चुकी है भुलावे में रहना
भारत के साथ पाकिस्तान के युद्ध का इतिहास कैसा रहा है? सामरिक रूप से ठीक, लेकिन रणनीतिक रूप से नुकसानदायक। यही वजह है कि वह पूरी ताकत से शुरुआत करने के बावजूद हर युद्ध हारता है। लेकिन 1971 और कारगिल यु...
2 months ago -
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:एक-दूसरे की देह का शोषण काम-ऊर्जा का दुरुपयोग है
अपराध वेश बदलने में बड़ा माहिर होता है। हर दौर में अपराध नई-नई शक्ल लेकर आता है। दार्शनिकों ने कहा है अपराध मिटता नहीं है, छुप जाता है और मौका मिलने पर सामने आ जाता है। आज राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिव...
2 months ago -
मेघना पंत का कॉलम:स्त्रियों के लिए फ्री बस टिकट चैरिटी नहीं, एक जरूरत है...
शाम होते ही भारत में बस स्टॉप पर खड़ी कोई महिला बस के रूट नंबर से पहले आसमान की ओर झांकने लगती है। इसलिए नहीं कि उसे बारिश की चिंता है, बल्कि इसलिए कि अंधेरे में यहां महिलाओं के लिए हर चीज के मायने बदल...
2 months ago -
एन. रघुरामन का कॉलम:छोटी-सी उपलब्धि पर बच्चे ‘डेंडेलियन का ताज’ क्यों पहन लेते हैं?
बहुत पहले मैं किसी काम से मुंबई के शिवाजी पार्क गया, जहां से सचिन तेंदुलकर जैसे खिलाड़ी निकले हैं। इसी वजह से क्रिकेट कोचिंग के लिए यहां आने वाले हर बच्चे की मां अपने बच्चे में ‘सचिन’ देखने लगी। जब तक...
2 months ago -
प्रियदर्शन का कॉलम:अपनी पहचान को भूगोल तक ही सीमित रखना उचित नहीं
पंजाबी संगीत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिन लोगों ने प्रतिष्ठा दिलाई है, उनमें दिलजीत सिंह दोसांझ भी हैं। गायन के अलावा अभिनय में भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी है। वे कई सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अ...
2 months ago -
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:परिवार बचें और मांओं- बहनों की प्रसन्नता भी बनी रहे
बहुत से लोग हैं, जिन्हें बाहर की दुनिया में दूसरे लोगों द्वारा खूब मान दिया जाता है। और ऐसे प्रभावशाली लोग जब घर आते हैं, तो कभी-कभी घर में उन्हें बहुत अपमान मिलता है। ऐसा क्यों हो जाता है? दरअसल परमा...
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एन. रघुरामन का कॉलम:म्यूजिक सीखना तनावपूर्ण हालात का इलाज बन सकता है
जॉन और उनकी पत्नी मैरी (दोनों परिवर्तित नाम) में से किसी के पास भी घर में छोटे-मोटे रिपेयर करने का कौशल नहीं था। इस रिटायर्ड कपल के पास पर्याप्त आमदनी है और घर में रिपेयरिंग को लेकर उन्हें ‘मिस्टर फिक...
2 months ago -
प्रो. चेतन सिंह सोलंकी का कॉलम:5 अक्षरों का यह फॉर्मूला क्लाइमेट बचाने की कुंजी साबित हो सकता है
जलवायु परिवर्तन पर चर्चा तो आज हर जगह होती है, लेकिन कार्रवाई अकसर प्रतीकात्मक कदमों तक सीमित रह जाती है। ये प्रयास समस्या का केवल छोटा हिस्सा छूते हैं। जबकि असली कारण हमारा रोजमर्रा का आधुनिक जीवन है...
2 months ago